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न्यायाधीश आज के देखे...

Feb 14, 2019
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Updated: Feb 18, 2019

आज के समय में देश के न्यायाधीशों की जो स्थितियाँ हैं उनका हमारा यह मर्म स्पर्शी बोध देखिये क्या कहता है ???


न्यायाधीशों के लिए सांकेतिक छायाचित्र

न्यायाधीश आज के देखे ,

बहुत विकृतियाँ लाद रखे |

स्वीकृतियों की बागडोर में , 

अनुकृतियों को तक रखे ||


भाषा उनकी पढ़ते हैं सब ,

अरिभाषा के अर्थ नये |

चमत्कार क्या कर बैठेंगे ,

यही सोचते लाख गये ||


खाक बचा न जिसका कुछ भी ,

उसका मन्तर बोल गया |

अंतर्मन को तौल देख फिर , 

क्या क्या अन्तर खोल गया ||


तुझमें और विधाता में कुछ ,

नहीं तनिक भी भेद यहाँ |

पर तूने तो खोया सबकुछ ,

जो बोया सो मोल गया ||


तौल तुला पर उस ही सब कुछ ,

अपनी माटी अपना ही बुत |

नंगा होकर जाने वाला ,

क्यों सोता है अब कुछ श्रुत ||


धन्य तेरा यह जीवन होगा ,

पावन तन मन यौवन होगा |

मन की लिप्सा डूब मरेगी ,

तन यह चन्दन वंदन होगा ||


हम तो उल्लू काठ कंठ तक ,

गांठ खोलने को आतुर |

पढता लिखता अपना मंथन , 

अपना बंधन अपना धुर ||

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